देश में बहुत सी निर्धन महिलाएं हैं, जिन्हें गर्भावस्था के दौरान ना तो आवश्यक पोषण मिल पाता है और ना ही उनकी पर्याप्त देखरेख हो पाती है।

कई महिलाओं को तो पैसे के लिए अपनी गर्भावस्था के दौरान भी काम करने पर विवश होना पड़ता है। इस प्रकार की महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना लाई गई थी,

जिसका बाद में नाम बदल दिया गया। आज हम आपको इसी योजना के बारे में विस्तार से बताएंगे। जैसे कि यह योजना क्या है?

दोस्तों, आपको बता दें कि इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना का शुभारंभ यूपीए सरकार में 2010 में किया गया था। उस वक्त इसे 650 जिलों में से 53 जिलों में लागू किया गया था।

2014 में केंद्र में सरकार बदल गई। इसके बाद आई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इसका नाम बदलकर मातृ सहज योजना किया और बाद में 1 जनवरी 2024 में इसे  के नाम से पूरे देश में लागू कर दिया।

इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना होता है, ताकि वह अपने साथ ही अपने नवजात बच्चे की भी देखभाल कर सके।

संक्षेप में कह सकते हैं कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए नकद (cash) प्रोत्साहन राशि प्रदान करना ही इसका मुख्य उद्देश्य है।

साथियों, इस इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना के तहत गर्भवती और शिशु को दूध पिलाने वाली महिलाओं को सरकार आर्थिक सहायता देती है‌। कुछ शर्तें पूरी करने पर एक महिला को 6,000 रुपये दिए जाते हैं।

गर्भवती महिला प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में अपना ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करके इस योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना की अधिक जानकारी के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें?